20 December 2005

शब्द प्राणायाम - 46 - 50

माँ-बाप


चलें,
मर्जी पर जब तक
उनकी,
बेटा-बेटा लगता है,
सिक्का अपना
चपेट मे बहू की
खोटा लगता है!














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अभागे

पवित्र मानकर
हज़ारों लोग
गंगा-यमुना में नहाते हैं,
एक डुबकी भी जो
आज तक, नहीं लगा पाये
कितने अभागे
किनारे होते हैं !














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जल्लाद

डालकर फंदा गले में
रस्म,
दुश्मनी-सी निभाना
होती है,
जल्लाद,
आदमी नहीं,
नौकरी होती है!














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वारंट

सबसे पहले
सतर्क वो
हो जाते हैं,
सफेद होकर
बाल,
संत हो जाते हैं!













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दाढ़ी

कितना काला काम
दिन भर में
आदमी
कर जाता है,
रोज़,
साफ़ चेहरे पर
दाढ़ी का बढ़ना
बताता है !













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-रमेशकुमार भद्रावले
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