20 December 2005

शब्द प्राणायाम - 51 - 55

अतिक्रमण

मुहिम,
प्रकृति ने भी
आदमी की तरह
अतिक्रमण की चलाई है,
सुनामी लहरों ने
मुहर, कहर की
झूमती ज़िन्दगी पर
लगायी है !














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आत्मसमर्पण

डाकू का
आत्मसमर्पण क्या हो गया,
चम्बल का शेर
सरकस में
आ गया !












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टेसू

जड़ से
चोटी तक
उसे,
सूखा छोड़ देता है,
होली पर आदमी
टेसू को,
पूरा निचोड़ लेता है !














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रोजगार

काम या बन्दरिया से
सचमुच,
जीवन चलता है,
पेट आदमी का
दोनों से,
पलता है !











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खाद

देशी,
पौधों को
विदेशी,
खाद देकर
बढ़ा रहे हैं,
बच्चों को आज
कॉन्वेन्ट में
पढ़ा रहे हैं !












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-रमेशकुमार भद्रावले

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